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वचनबद्ध बने रहे

वादा करना सोच के, बिन सोचे पछताय।
पूरा जो करते वचन, खुद का मान बढाय॥

किसी भी तरह का वादा करने से पहले हजार बार सोचिए लेकिन एक बार वचनबद्ध हो गए तो वचनबद्ध बने रहिए। उन लोगों से सावधान रहिए जो वादे करने की जल्दी में होते हैं अक्सर ऐसे लोग किए वादे नहीं निभाते हैं और यकीन दिलाने लायक बहाने ढूँढ़ ही लेते हैं। वचनबद्ध होने के पहले समस्त निष्कर्षों पर विचार कर लेना चाहिए। वादा करने से पहले अपनी क्षमता, उपलब्धता और समयावधि का आकलन करना चाहिए। कई बार, भावुक होकर हम किसी चीज के बारे में आजीवन वचनबद्ध हो जाते हैं और बाद में पछताते रहते हैं।

जो लोग अपने काम से मुँह चुराते हैं, वे अपनी वचनबद्धता के प्रति भी लापरवाह होते हैं। परिवार, मित्रों, सहकर्मी और समाज से उन्हें कभी आदर-सम्मान नहीं मिलता है। बाह्य परिस्थितियों में बदलाव के चलते काम या वादा पूर्ण करने में बाधा आ रही हो तो सम्बंधित व्यक्तियों के साथ बैठिए, उन्हें कारण समझाइए, मनाइए और आश्वस्त कीजिए। इससे आपकी प्रतिष्ठा पर आँच नहीं आएगी।

वचनबद्धता निभाने के पाँच उपाय
१.      अनिवार्यता हो तभी वादे कीजिए।
२.      जितना वादा कीजिए, उससे ज्यादा दीजिए।
३.      वचनबद्ध होने पर हर हाल में उस पर कायम रहिए।
४.      वादा पूरा करना मुमकिन न हो पाए तो भी पारदर्शिता बनाए रखिए।
५.      आर्थिक, सावधिक, ऊर्जा अथवा संसाधन के नुकसान को वादे से पीछे हटने का कारण न बनाइए।

Hemant Lodha

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