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उत्साह से उत्साह बढ़े

उत्साह से उत्साह बढ़े, लेकर सबको साथ।
मन उमंग से रहे भरा, बँधे हाथ में हाथ॥

किसी समूह या जनसमूह में एक ऐसे व्यक्ति को आपने भी जरुर देखा होगा कि जिसमें सारे माहौल को उत्साह में भर देने की क्षमता हो. इस तरह के लोग जैसे ही प्रवेश करते हैं, हर किसी में प्राण फूँक देते हैं और इनके विदा होते ही लोग पिचके हुए गुब्बारे की तरह महसूस करने लगते हैं. ऐसे लोग सकारात्मक विचारों, ऊर्जा और उच्च स्तरीय उमंग से भरपूर होते हैं. उनकी उपस्थिति में बड़ी से बड़ी समस्या भी या तो मामूली लगने लगती है या फिर गायब हो जाती है. ऐसे लोग अपने समूचे समूह में उत्साह भरते रहते हैं और उत्साह से भरपूर समूह में पहाड़ को भी डिगा देने की क्षमता होती है.

क्या आपने अभी सोचा है कि ऐसे व्यक्तित्व के राज क्या हैं? वे हमेशा ऊर्जा से भरपूर क्यों होते हैं? मुझे लगता है वे असंभव शब्द को सदैव अस-भव (अस=ऐसे + भव=होगा) के भाव में ग्रहण करते हैं. वे ‘हाँ मैं कर सकता हूँ’ मिजाज़ के संवाहक होते हैं. समस्या पैदा होते ही वे फटाफट वैकल्पिक मार्ग तलाश कर लेते हैं तथा हमेशा अपना संयम बनाए रखते हैं. वे कभी निराश नहीं होते. अपने संपर्क में आने वाले हर माहौल में उत्साह भरते रहते हैं.

उत्साह बरक़रार रखने के पाँच उपाय
१. सकारात्मक सोचो, सकारात्मक बोलो, सकरात्मक करो.
२. अभी यानी वर्तमान क्षण का आनंद लो.
३. खुशमिजाज़ रहो और दूसरों को भी खुशमिजाज़ रहने के लिए प्रेरित करो.
४. समस्यों को मौका मानो.
५. ‘हाँ मैं कर सकता हूँ’ और ‘हाँ मैं करुँगा ही’ को अपना मिजाज़ बना लो.

Hemant Lodha

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