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शत्रुता से ताकत घटती है

शत्रुता अंतिम विकल्प होना चाहिए और यह फैसला पूरे होशो-हवास में लेना चाहिए. भरसक यही कोशिश रहे कि इस विकल्प का चयन ही न करना पड़े. फिर भी, कई बार समझौते असंभव हो ही जाते हैं, ऐसे हालात में शीत युद्ध ही बेहतर विकल्प होता है.
शत्रुता से दोनों ओर की ताकत घटती है. इससे मानसिक, शारीरिक एवं भावनात्मक बल नष्ट होता है. इससे अमन – चैन के साथ वह तमाम ऊर्जा, समय और धन भी नष्ट होता है, जिसका इस्तेमाल रचनात्मक उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है.
शाब्दिक, अरक्षित एवं पारदर्शी संवाद ही सर्वोत्तम तरीका है शत्रुता ख़त्म करने और समझौते करते हुए लाभ की स्थिति हासिल करने का. हालाँकि कई बार स्वार्थजन्य नकारात्मक शक्तियां इसमें अड़ंगा लगाती हैं लेकिन फिर भी सब के लिए फायदे का सौदा हमेशा बेहतर होता है.

शत्रुता टालने के पाँच उपाय

१. जैसे ही लगे कि शत्रुता हो सकती है तुरंत संवाद रोक दिया जाना चाहिए.
२. पुनश्च जब संभव हो संवाद शुरु करना चाहिए.
३. यदि लगे कि आप आपने दम पर समझौते तक नहीं पहुँच पाएंगे तो मध्यस्थ की मदद लेनी चाहिए.
४. कुछ बातों को जाने देना चाहिए. समय सबसे चिकित्सक होता है.
५. भूल जाओ और क्षमा करो.

Hemant Lodha

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