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परिवार ही सर्वोपरि

लालच जीवन में कई, सर्व प्रथम परिवार।
साथ सबका जब छूटे, अडिग यही दीवार॥

आजकल की जिन्दगी की विडंबना है कि हमें अपने जिस परिवार को प्राथमिकता देनी चाहिए, उसे हम कार्य, धन, ताकत और यश के फेर में ज्यादातर उपेक्षित रखते हैं। लोग सुकून की कीमत पर धनसंपन्न हो रहे हैं। हम मकान बना रहे हैं लेकिन घर खोते जा रहे हैं, हम वाहन खरीद ले रहे हैं लेकिन परवाह करने वाले हमसे छूट रहे हैं, हम दुनिया भर में घूम रहे हैं लेकिन अपनी दुनिया ही नजरंदाज है हमसे। जरा सोचिए जिस रोज आप अपना स्वास्थ्य, कार्य, ताकत, धन, मित्र, यश सब खो चुके होंगे, आपका परिवार आपके साथ खड़ा रहेगा।

अपने परिवार के लिए भौतिक सुख सुविधाएं जुटाने की दौड़ में हम अपने ही परिवारजनों की भावनाओं, सम्मान और फ़िक्र को उपेक्षित रखते हैं। अपनी आजीविका के लिए हम अपने बुजुर्गों को छोड़ देते हैं और कई बार तो पत्नी और बच्चे भी उपेक्षित हो जाते हैं। अंततः अपनी उपलब्धियों तक पहुँचते हुए हमें महसूस होता है कि परिवार हमसे इतने पीछे छूट गया है कि वहाँ से वापसी ही संभव नहीं।

परिवार को महत्व देने के ये पाँच उपाय
१.      संवेदनशील बनें. परिवार के हर सदस्य की भावनाओं से अवगत होते रहें और परिजनों की जरुरी इच्छाओं को पूरा करने का प्रयास करते रहें।
२.      पारदर्शी रहें। स्पष्ट और सतत संवाद ही अंतहीन सम्बंधो की चाभी हैं।
३.      समस्त आयोजनों जैसे जन्मदिन, वर्षगाँठ एवं तीज-त्योहारों को सम्पूर्ण उत्साह के साथ मनाएं।
४.      नियोजन कर वर्ष भर में कम से कम दो बार छुट्टियाँ अवश्य लें।
५.      परिवार का कोई सदस्य वृद्धावस्था में है अथवा बीमार है तो उसके साथ चट्टान की तरह खड़े रहें।

Hemant Lodha

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