दृष्टि के परे देखना

भोजन ग्रहण करते समय मैं नाजुकमिजाज रहा हूँ और अब भी हूँ। पकवान मेरे सामने परोसा गया तो मैं उसे तीन स्तरों पर ग्रहण करता हूँ। पहले मैं उसे अपनी आँखों से खाता हूँ फिर […]

विचार बने आचार

क्रियान्वयन के बिना विचार जैसे हवा बिना गुब्बारे. करोड़ों लोगों द्वारा लाखों विचार प्रतिदिन उत्सर्जित होते हैं लेकिन इनमें से 99.99% दिन का उजाला भी नहीं देख पाते। किसी भी प्रकार के क्रियान्वन के बिना […]

निष्कपट विनम्रता

मैं उन लोगों से सतर्क रहता हूँ जो बहुत मीठा बोलते हैं. लोगों के चेहरे पर अनेक मुखौटे होते हैं, अतः उनके इरादे भाँपना अक्सर कठिन हो जाता है, खासकर तब कि जब आप उनसे […]

वचनबद्ध बने रहे

वादा करना सोच के, बिन सोचे पछताय। पूरा जो करते वचन, खुद का मान बढाय॥ किसी भी तरह का वादा करने से पहले हजार बार सोचिए लेकिन एक बार वचनबद्ध हो गए तो वचनबद्ध बने […]