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निष्कपट विनम्रता

मैं उन लोगों से सतर्क रहता हूँ जो बहुत मीठा बोलते हैं. लोगों के चेहरे पर अनेक मुखौटे होते हैं, अतः उनके इरादे भाँपना अक्सर कठिन हो जाता है, खासकर तब कि जब आप उनसे पूरी तरह परिचित न हों. सम्बंध बनाने, बढ़ाने और निभाने के लिए विनम्रता जरुरी है. लेकिन यदि आपकी विनम्रता में कपट है तो लोग उसे पहचान ही लेंगे और आप पर विश्वास नहीं करेंगे. विनम्रता में यदि बेईमानी या कपट है यानी आपके जबान पर जो शब्द हैं, दिमाग में उससे कुछ अलग ही इरादे पनप रहे हैं. इसका मतलब कि आपकी कथनी और करनी में साम्यता नहीं है.

ऐसे भी लोग हैं जो दिल से ईमानदार हैं लेकिन यह नहीं जानते कि विनम्रता कैसे प्रदर्शित की जाए. ऐसे लोगों को दूसरों से जुड़ने में अड़चन होती है. विनम्रता का कारगर औजार है मुस्कुराहट. हालाँकि यह अत्यंत सहज अभिव्यक्ति है फिर भी कुछ लोग इसे अपने चेहरे पर उतार पाने में असफल होते हैं. विनम्र लोग आमतौर पर किसी भी शब्द को उच्चारने से पहले बार-बार सोचते हैं और समझकर ही उसका प्रयोग करते हैं. शुरुआत में सतर्क कोशिशों की जरुरत होती है फिर सतत अभ्यास से व्यक्ति सोच-समझकर बोलने में सिद्धहस्त हो जाता है.

विनम्र बनने के पाँच उपाय 

  1. अभिव्यक्ति से पहले सोचना चाहिए.
  2. चेहरे पर निश्छल मुस्कराहट हो.
  3. नियमित ध्यान से भावनाओं को नियंत्रित करने में सहायता होगी.
  4. बोलते समय सावधानीपूर्वक शब्दों का चयन करना चाहिए.
  5. अहम् का त्याग करें.
Hemant Lodha

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