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नकारात्मक तनाव हटाएं

सकारात्मकता बने ,रह ना सके नकार।
बढ़ता रहे तनाव ही ,नकारात्मक सार॥

आधुनिक दौर में तनाव अपरिहार्य है. शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के चलते जरुरतें दिन-बी-दिन बढ़ती जा रही हैं. इच्छाओं और अपेक्षाओं को घटाना आसान नहीं है. स्पर्धा और तुलना इतनी हावी हैं कि यदि आप इसमें न भी पड़ना चाहें तो भी परिवार का एक न एक सदस्य आपको स्पर्धा और तुलना करने के लिए बाध्य करेगा ही. अपूर्ण इच्छाएं और अपेक्षाएं तनाव का स्तर बढ़ा देती हैं.

तनाव दो तरह के होते हैं, सकारात्मक और नकारात्मक. सकारात्मक तनाव से प्रगति होती है जबकि नकारात्मक तनाव से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है. किसी भी क्षेत्र में प्रगति, यहाँ तक कि आध्यात्मिक प्रगति भी, यत्किंचित तनाव के बिना संभव नहीं. महावीर, बुद्ध, क्राइस्ट, मुहम्मद, गाँधी और मदर टेरेसा आदि सभी सकारात्मक तनाव से गुजरे और अपने लक्ष्य के सर्वोच्च स्तर को हासिल कर पाए. तनाव निर्माण की प्रक्रिया हमारी ज्ञानेंद्रियों से शुरु होती है. ज्ञानेन्द्रियाँ महसूस करती हैं और दिमाग सोचते हुए इच्छाएं और अपेक्षाएं उत्पन्न करता जाता है. इच्छाएं आसक्ति पैदा करती है, जिन्हें न पाने पर क्रोध पनपता है. जब क्रोध शुरु होता है तो बुद्धि काम करना बंद कर देती है और इससे मनुष्य के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं आध्यात्मिक सेहत की दुर्गति होने लगती है.

नकारात्मक तनाव से उबरने के पांच उपाय

१.            नकारात्मक एवं सकारात्मक तनाव के बीच फर्क करना सीखिए और नकारात्मक तनाव को दूर करने के लिए  ध्यान-प्राणायाम का सहारा लीजिए.
२.            असफलता का भय ही तनाव की मुख्य वजह है. इस भय का सामना कीजिए.
३.            बेफिक्र होना सीखिए.
४.            अपेक्षाएं घटाइए.
५.            सकारात्मक सोचिए.

Hemant Lodha

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