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मित्र बहुमूल्य धरोहर

मित्र धरोहर मोल नहीं, छोड़े कभी न हाथ।
रहे सदा यह भावना, नहीं स्वार्थ का साथ॥

मित्रता करना आसान है लेकिन आजीवन मैत्री निभाने के लिए उच्च स्तरीय भावनात्मक समझदारी की जरुरत होती है। सोशल नेटवर्किंग के इस दौर पर सिर्फ एक क्लिक से आप मित्र बना सकते हैं। लेकिन ऐसी दोस्ती सिर्फ नाम की ही रह जाती है। सच्चा दोस्त वही है जिससे आप अपने सुख-दुःख बराबर साझा कर सकते हैं। सच्चा दोस्त आपके सौभाग्य से इर्ष्या नहीं करता और आपके दुःख-दर्द पर अट्टहास नहीं करता है।

मित्रता जाति एवं वर्ण से परे होती है, वर्ग एवं रंग से ऊपर होती है, उम्र और लिंग की संगत नहीं मानती। एक अच्छा मित्र हो तो जिंदगी आसानी से गुजर जाती है. मित्रता लेन-देन पर आधारित सम्बंध नहीं है। अच्छी मित्रता में बिना शर्त सिर्फ दिया ही जाता है।

मित्रता में उम्मीद किसी चीज की नहीं करनी चाहिए और स्वीकार सबकुछ करना चाहिए। जैसे ही उम्मीद बीच में आती है, मित्रता शनैः-शनैः ख़त्म होने लगती है। आपके मित्र में अनेक गुण हो सकते हैं, जो आपके गुण से अलहदा होंगे, बिना सवाल के उन्हें स्वीकार कीजिए। जैसे आप सेब को सेब की तरह और केले को केले की तरह स्वीकार करते हैं, बिना यह सवाल किए कि केले का स्वाद सेब की तरह क्यों नहीं और सेब का केले के जैसे।

आजीवन मैत्री के पाँच उपाय
१.      कोई उम्मीद न करें।
२.      मित्र जैसा है, वैसे ही उसे स्वीकार करें।
३.      मित्र के समक्ष किसी तरह का बनावटीपन न करें।
४.      अपने मित्र की जरुरतों को समझने और उन्हें पूर्ण करने के लिए भावनात्मक समझदारी दिखाएं।
५.      मिलना-जुलना और बातचीत नियमित होती रहे।

Hemant Lodha

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