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अहंकार सम्बंध विनाशक

संबंधो का नाश करे,  मन हो अहंकार।
साथ जीवन भर चले, बिन घमंड का प्यार॥

मैं ऐसे कई लोगों को जानता हूँ जिनकी अपने प्रिय एवं करीबी परिजनों से इसलिए बोलचाल नहीं है क्योंकि अतीत में तुच्छ कारणों से वे एक-दूसरे से आहत हुए और जबसे आहत हुए, दोनों जन इसी बात पर अड़े हुए हैं कि दिल उसने पहले दुखाया था तो माफ़ी भी पहले उसी को मांगनी चाहिए, मैं क्यों पहल करुँ. इस इंतजार में दोनों पक्ष, एक-दूसरे के लिए तमाम नकारात्मक धारणाएं बनाते हुए घृणा की एक काल्पनिक दीवार अपने बीच खड़ी करते जाते हैं.
व्यावसायिक सम्बंधों में भी अक्सर यह घटित होता है. अहं भाव सामूहिकता और प्रदर्शन को एक साथ नष्ट करते हुए, समूह और उसमें सम्मिलित लोगों को नकारात्मक रुप से प्रभावित करता है.
हालाँकि यह सच है कि अहंकार से ग्रस्त व्यक्ति की सबसे बड़ी कमजोरी संवाद में उसका पारंगत न होना ही है, लेकिन बेहतर तरीका तो यही है कि दोनों में से किसी एक पक्ष द्वारा संवाद की पहल कर निष्क्रियता सुलझायी जाए और सम्बंध बचाए जाएं. अहंकारी व्यक्ति नकारात्मकता फैलाते हैं और उनकी आभा मुरझा जाती है.

अहं से उबरने के पांच उपाय
१. अहं और स्वाभिमान में घालमेल से बचिए.
२. करीबी सम्बंधों में हमेशा अहं त्यागकर संवाद की पहल करनी चाहिए.
३. तरक्की करते हुए अधिकाधिक विनम्र बनिए.
४. संगठन के लक्ष्यों को अहं से ज्यादा तरजीह दीजिए.
५. अध्यात्म के पथ पर चलकर अहं को वाष्पित करते रहिए.

Hemant Lodha

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