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दृष्टि के परे देखना

भोजन ग्रहण करते समय मैं नाजुकमिजाज रहा हूँ और अब भी हूँ। पकवान मेरे सामने परोसा गया तो मैं उसे तीन स्तरों पर ग्रहण करता हूँ। पहले मैं उसे अपनी आँखों से खाता हूँ फिर नाक से और फिर रसना यानी जीभ से। इस प्रक्रिया के चलते मैं दुनियाभर में उपलब्ध स्वादिष्ट पकवान के रसास्वादन से अब तक वंचित हूँ। असल जीवन में भी हम रुप से इतने अभिभूत होते हैं कि अक्सर हम चीजों के असल गुणों और व्यक्तियों के भीतरी सौन्दर्य को नजरंदाज कर जाते हैं।

एक बार महान लेखक जॉर्ज बर्नार्ड शॉ एक बेहद सुंदर महिला के संपर्क में आए। उस महिला ने लेखक महाशय के समक्ष इस मंशा से अपने प्रेम का इजहार किया कि उसका सौन्दर्य और उनकी बुद्धि के संयोग से जो संतति होगी वह अद्भुत होगी। लेखक महाशय ने यह कहकर उस महिला का प्रेम प्रस्ताव ठुकरा दिया, ‘मान लो यदि उल्टा घट गया और आपकी बुद्धि तथा मेरा चेहरा संतति को मिल गया तो?’ खैर, यह तो मजाक की बात हुई, पर सुंदर चेहरे कई बार छल सकते हैं। इसलिए जो दृष्टि में है, उससे परे देखना चाहिए। व्यक्ति के भीतरी सौन्दर्य से बढ़कर कुछ सुंदर नहीं।

भीतरी सौन्दर्य देखने के पाँच उपाय
1. बाहरी सुंदरता के आधार पर नतीजा न निकालें।
2. भीतरी गुणों को परखने की कोशिश करें।
3. लोगों का इस्तेमाल और चीजों से प्रेम करने की बजाय चीजों का इस्तेमाल करें और लोगों से प्रेम करें।
4. अक्सर लोगों के चेहरे पर नकाब होता है, इस नकाब के पीछे देखने की कोशिश करें।
5. व्यक्ति कठिन नहीं होते हैं, बस अलग होते हैं।

Hemant Lodha

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