सहानुभूतिपूर्वक सुनना

अनुसंधानों से ज्ञात हुआ है कि हम शब्दों के जरिए सिर्फ 30-35 प्रतिशत ही अभिव्यक्त कर सकते हैं, शेष अभिव्यक्ति हमारी भाव-भंगिमा से होती है। विद्यालय हमें लिखने-पढ़ने का सलीका सिखाते हैं, लेकिन शायद ही […]

भाग्य व्यक्तिवादी है

हमारा दो भाई और दो बहनों का परिवार है और हम चारों का भाग्य और जीवन एक–दूसरे से जुदा है। मैं कोई नयी बात नहीं कह रहा हूँ। सभी सहोदरों की यही कहानी है। माता–पिता […]