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भूलो और क्षमा करो

वीरों का गहना क्षमा,भूलें और भुलाय।
अहं प्रेम को नष्ट करे, रिश्ते सब मिट जाय॥

यदि आप लोगों को माफ़ नहीं करेंगे तो वे मुफ्त में ही आपके दिल-दिमाग में जगह कब्जा बनाए रखेंगे। मैं सहमत हूँ कि कहना आसान है, करना मुश्किल। न ही आसानी से भूला जा सकता है और न ही क्षमा किया जा सकता है। लेकिन यदि गैर-जरुरी और दर्दनाक घटनाओं को भूलने की कोशिश नहीं की जाएगी तथा अपने प्रिय व करीबी लोगों को माफ़ नहीं किया जाएगा, तो जिंदगी चिंताओं और तनावों से भरी रहेगी जिसका सीधा असर खुद पर ज्यादा, औरों पर शायद ही होगा। पूरी संभावना होती है कि अगला व्यक्ति सबकुछ भूल-भुलाकर अपनी जिंदगी में राजी-खुशी के साथ आगे बढ़ रहा हो, जबकि हम उसी घटना को याद करते हुए अपने स्वास्थ्य एवं मनःस्थिति को लगातार खराब किए जा रहे हो।

भूलने और माफ़ करने के लिए यह जरुरी है कि आप स्थितियों का तटस्थता से आकलन करें। हमें समस्या और घटनाओं को दूसरे पहलू से भी देखना होगा। खुद को दूसरे की जगह रखकर हालात समझने होंगे। हर व्यक्ति का व्यवहार उसकी परवरिश, स्थितियों और अनुभवों पर आधारित होता है। यह समझने की जरुरत होती है उस व्यक्ति का आचरण, आपकी उम्मीदों से विपरीत है तो क्यों है। अपने आचरण के तटस्थ आकलन की भी जरुरत होती है कि स्वयं आपने तर्कसंगत व्यवहार किया था या नहीं। हो सकता है हमने ही भावावेश में बिना सोचे-विचारे कुछ कह दिया हो।

भूलने एवं क्षमा करने के पाँच उपाय
१.      सम्बंधों को ज्यादा अहमियत दीजिए।
२.      दूरंदेशी बनिए।
३.      अहंकार से मुक्त होने के लिए खुद को विवेकसम्मत बनाइए।
४.      हो सकता है अगले व्यक्ति का विवेक न जागा हो पर आप अपने विवेक को जगा कर रखिये।
५.      गलतफहमियों से बचने-बचाने के लिए संवाद करते रहिए।

Hemant Lodha

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