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भय मनोवैज्ञानिक होता है

भय तो मन का वहम है, होते कई प्रकार।
हम जब करते सामना, भय के मिटे विचार॥

भय युक्तिसंगत अवस्था नहीं है, ज्यादातर बार यह मनोवैज्ञानिक होती है। यहाँ मैं आतंकी संगठन जैसी आशंकाओं के चलते उत्पन्न होने वाले भय की बात बिलकुल नहीं कर रहा हूँ। मनोवैज्ञानिक भय कई प्रकार के होते हैं. नाकामयाबी का भय, अकेलेपन का भय, ऊँचाईयों से भय, अँधेरे से भय आदि। बचपन अथवा बाद की उम्र के जाने-अनजाने हुए अनुभव या फिर उनके प्रभाव ही इस तरह के भय के संभावित कारण होते हैं. भारतीय पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भय पिछले से अगले जन्म तक साथ बने रह सकता है।

हालाँकि ज्यादातर भय उन्नति में रुकावट का कारण बनते हैं, इसमें असफलता का भय सबसे खतरनाक होता है, फिर भी बेहतर प्रदर्शन के लिए कुछ हद तक भय अच्छे होते हैं। मैंने अनेक देशों में तथा अनेक देश के नागरिकों के साथ काम किया है और मेरा यह अनुभव रहा है कि भारतीय लोगों का प्रदर्शन तब सबसे बेहतर होता है जब उन पर अपने वरिष्ठों का भय नाममात्र को होता है। भय से निबटने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि उसका सामना किया जाए। जब आप भय का सामना सिर उठाकर करते हैं, भय छू-मंतर हो जाता है और आपका आत्मविश्वास उभर जाता है। जैसे ही एक भय को आप भगाते हैं, वैसे ही आपका आत्मविश्वास जिन्दगी के अन्य सभी भय को जीतने लगता है और आप निर्भय जिन्दगी बिताने की तरफ अग्रसर होने लगते हैं।

भय से निपटारे के पाँच उपाय
१.      सामना करे।
२.      ज्यादातर लोग ईश्वरीय आस्था के जरिए भय का मुकाबला करते हैं।
३.      यदि यह एक गंभीर समस्या बन जाए तो मनोचिकित्सक की मदद ली जानी चाहिए।
४.      छोटे-छोटे भय को जीतते रहें जिससे बड़े भय से निपटने की हिम्मत मिलेगी।
५.      ध्यान, योग और प्राणायाम की सहायता से भय से मुक्ति मिलेगी।

Hemant Lodha

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